पाइल्स का पूर्णतया समाधान होम्योपैथी से संभव:- डॉ हेमंत श्रीवास्तव


 

देवदह विशेष ।

: बवासीर या पाइल्स का सबसे महत्वपूर्ण कारण आज की बदलती जीवनशैली है।  हमारे खाने में बसा या चर्बी की मात्रा बढ़ती जा रही है। उसी समय हमारी दिनचर्या में चलना फिरना और महनत मशक्कत कम हो गया है। हम अधिकतर समय बैठे रहते हैं। स्कूटर या गाड़ी में चलते हैं।  पैदल चलना और साइकिल चलना हमारे जीवन का हिस्सा नहीं रहे हैं। घर का काम भी मशीनों से हो जाता है। इन सब कारणों से मोटापा जन साधारण में बढ़ता जा रहा है। इस बढ़ते हुए वज़न की वजह से हमारी पाचन शक्ति कमज़ोर होती जा रही है। एक और कारण है हमारे  खाने में मिर्च और मसालों का अधिक प्रयोग।

बवासीर हमारे गुदा क्षेत्र को प्रभावित करने वाली बीमारी है। खून का दौरा कम होने से गुदा क्षेत्र की नसें फूल जाती हैं। यह सूजी हुई नसें दर्द और खुजली पैदा करती हैं ।  इन की वजह से बैठना, खड़े होना और चलना मुश्किल हो जाता

बवासीर आम तौर पर दो प्रकार की होती है। ये  खूनी बवासीर और बादी बवासीर के नाम से जानी जाती हैं। खून के स्राव वाली बवासीर को खूनी बवासीर हैं तथा जहां खून का स्राव नहीं होता है उसे बादी बवासीर कहते हैं। बवासीर अंदरूनी या बाहरी भी हो सकती है।

डॉ हेमन्त श्रीवास्तव बताते हैं कि इसके लक्षण प्रायः

मल त्याग करते समय दर्द होती है। कई लोगों में यह दर्द तीखी चुभन की तरह होती है और कई  लोगों में यह मीठी मीठी दर्द रहती है।  दर्द मल त्याग करने के बाद कई घंटों तक रह सकती ह, जिस वजह से चलना और बैठना मुश्किल होता है।

कई लोगों में किसी प्रकार की खुजली महसूस होती है।  यह खुजली गुदा द्वार में और उस के आस पास होती है।

 कुछ लोगों में खून का स्राव होता है।  यह खून का स्राव मल त्याग करते समय होता है। यह खून लाल रंग का ताज़ा खून होता है।अपनी जीवन शैली में कुछ बदलाव लाना बवासीर या पाइल्स के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक रहता है।


अपने खाने में रेशे की मात्रा बढ़ानी चाहिए। इस के अनेक लाभ होते हैं। एक तो इस से कब्ज़ नहीं होती। दूसरा इसे से वज़न कम रहता है। तीसरा इस से मल त्याग करने के लिए ज़ोर नहीं लगाना पड़ता।

मांस मछली खाना कम करना चाहिए। सादा भोजन जिस में फल और सब्ज़ियां ज़्यादा हों फायदेमंद रहता है। डॉ हेमन्त श्रीवास्तव बताते हैं कि

पानी की मात्रा अधिक रखनी चाहिए। इस से भी कब्ज़ होने का खतरा नहीं रहता।

प्रतिदिन सैर करनी चाहिए। यह पाचन शक्ति को बढाती हैं तथा कब्ज़ नहीं होने देती।

मल त्याग करते समय ज़ोर नहीं लगाना चाहिए।

अधिक समय तक बैठे रहना बवासीर के रोगियों के लिए अच्छा नहीं है। चलते रहना उन के लिए लाभकारी है।

गर्म पानी के टब में कुछ देर बैठने से सूजन कम हो जाती है और दर्द को भी आराम मिलता है।

होम्योपैथिक में बाबासीर को  समाप्त करने की दवाइयां उपलब्ध है इनको कुछ समय लेने के उपरांत बवासीर पूर्णतया समाप्त हो सकता है!



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